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Aarav Abhigyan
छोटे शहर की बड़ी कहानी! (READ IN CAPTION) #MeraShehar बिहार का पश्चिम चम्पाराण जिला जहाँ से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने अपने सत्याग्रह आंदोलन की शुरूवात की थी! वही के रामनगर विधानसभा मे जन्मे थे दोनों भाई ! उम्र मे ज्यादा फ़र्क न होने के कारण दोनों की पढ़ायी साथ-साथ शुरू हुइ! बेतिया मे एक ही स्कूल से दोनो ने 10वी की परिक्षा दी और जब परिणाम आये तो दोनों को बराबर नम्बर मिले और दोनों ने स्कूल का नाम रोशन किया! फ़िर दोनों आंखों मे IIT की प्रवेश परिक्षा उत्तीर्ण कर उसमे दाखिला लेने का सपना लिए घर से लगभग 1500किमी दुर राजस्थान की शिक्षा नगर
#MeraShehar बिहार का पश्चिम चम्पाराण जिला जहाँ से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने अपने सत्याग्रह आंदोलन की शुरूवात की थी! वही के रामनगर विधानसभा मे जन्मे थे दोनों भाई ! उम्र मे ज्यादा फ़र्क न होने के कारण दोनों की पढ़ायी साथ-साथ शुरू हुइ! बेतिया मे एक ही स्कूल से दोनो ने 10वी की परिक्षा दी और जब परिणाम आये तो दोनों को बराबर नम्बर मिले और दोनों ने स्कूल का नाम रोशन किया! फ़िर दोनों आंखों मे IIT की प्रवेश परिक्षा उत्तीर्ण कर उसमे दाखिला लेने का सपना लिए घर से लगभग 1500किमी दुर राजस्थान की शिक्षा नगर
read moreAjit Ahirwar
"वक़्त" और "अध्यापक" दोनों हमें सिखाते हैं। पर फर्क सिर्फ इतना है कि... "अध्यापक" सिखा कर "परिक्षा" लेते हैंऔर "वक़्त " परिक्षा लेकर "सिखात" है।
Doli dk
उन दिनों की बात है जब मैं छोटी-सी थी तब बहुत नादान भी थी।मुझे बचपन से ही बच्चों को प्यार करना बहुत भाता था ।पर ये अपने बदो को नहीं अच्छा लगता था क्योकिं मैं ऊनकी बच्ची जो थी ।लगता था मुझे की मैं बच्चों की माँ हूँ ।मैं बहुत प्यार से अपने गोद रख कर चम्मच से दुध पिलाना,उसे पुचकार कर सुलाना बड़ा अच्छा लगता था।यहाँ तक की जब बच्चों की माँ पास में न होती तो मैं अपने होंठ को चूसने दे देती जिससे बच्चा को लगता की मैंने दुध दे रही हूँ ।बच्चे बड़े आराम से सो भी जाते तब मुझे बहुत खुशी4मेहसूस होता ऐसा••••••लगता मानो मैनें बहुत प्यारा काम किया है जिससे मेरे मन को सुकून मिलती।फिर मै आराम से बच्चे को कन्धे पे लेके घुमाती।फिर सूला देती।एक बार ऐसा हुआ की मेरी एक दी अपने घर मुझे इसलिये ले गयी ताकि मैं निशु को सम्भाल सकूँ ।उस वक़्त मेरी पढ़ाई भी जारी थी कहा जाए तो कालेज की पहली सीढ़ी शुरू हुई थी ।मैं पर कालेज जन पसन्द नहीं करती थी।तो दी के घर चली गयीं, वो स्कूल पढ़ाने जाती और मैं निशु का देखभाल करती।इसके लिए मैं घर में साड़ी को लकड़ी के खम्भे में बान्ध के झुला बनायी थी जो बहुत ही प्यारा थीं निसू उसमें सोती तो बहुत खुश हो जाती ।मैं तब तक और भी काम निबटा लेती। मैं हमेशा उसे तैयार करके उस झूले मे डाल कर झूला देते ओ भी खूश हो जाती ।फिर छोटा फोन मे गाना बजा के रख देते और खुश हो जाती।ऐसा ही रोज चलते रहा, मेरी पढाई भी थोड़ी हो जाती। उस वक्त दी मुझे खाना बनाने भी सिखाती।अचानक एक दिन पता चला मेरा परिक्षा है मुझे जाना पड़ा।मैं तो चली गयीं ,पर ऐसा होगा कोई सोच भी नहीं सकता की निसू खाना-पिना ही छोड़ दी। बस मुझे ढूँढती और न नजर आती तो बस रोती फिर दी- जीजू भी परेशान ।उनलोग ने मुझे फोन किये ।बोले तुम जैसे भी हो सके वापस लौट आव ।मेरी बेटी मर जायेगी ।ओ खाना- पीना भी छोड़ दी है ।मैं भी परेशान ।दी बोली मैं न तुम्हारे सर से बात कर यहीं से परीक्षा दिलवा दुन्गी ।अब क्या करूँमुझे भी समझ नी आ रहा था।मिझे भी रोना आ रहा था क्युकि उधर मेरी बाबू रो रही है।ईधर मेरा परीक्षा ••• फिर मैं वापस लौट आई।फिर निसू भी खुश और खुशी तब मिली जब मेरी परिक्षा का तारिख भी आगें बढ़ गया।तब से हमलोग का प्यार और भी बढ़ गया। सबसे बड़ी बात निसू के कारण मैं शहर में रहकर पढाई कर पायी ।क्युकि दी मेरा साथ देकर पापा माँ को समझाई ।और आज मैं खुद पर निर्भर हूँ ।लोगो को भी आत्मनिर्भर बनने की सीख देती हूँ ।बहुत लोग तो मेरी पीछे की जिन्दगी क बारे में जानकर खुद से सम्भलने की चाह रखते हैं। I Love you nisu & miss u. #NojotoQuote #आगे #बढ़ने #की #वजह••# Rupa Kumari Shaw
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